25 सितम्बर – मलबार हिन्दू नरसंहार स्मृति दिवस
105 वर्ष पहले, मतांधता से उन्मत्त हुए एक वर्ग के हिंसक लोगों के नरसंहार के सामने असहाय होकर तड़प-तड़प कर प्राण गंवाने वाले हजारों लोग!
स्वधर्म पर अडिग रहने के लिए अपने प्राणों का बलिदान देकर इस संसार से विदा हो गए उन पूर्वजों की स्मृति को यह वीडियो समर्पित है!!
1921 के मलबार विद्रोह के दौरान हुए जबरन मातान्तरण, सामूहिक हत्याएँ, मंदिरों का विध्वंस, मूर्तियों का विनाश आदि के उन अंधकारमय अध्यायों की यह वीडियो याद दिलाता है।
विद्रोह और विद्रोहियों को सही ठहराने और उनका महिमामंडन करने वाले कुछ निहित स्वार्थी लोगों द्वारा फैलाए जा रहे प्रचार के विपरीत, यह कोई स्वतंत्रता संग्राम या किसान आंदोलन नहीं था! यह एक भीषण नरसंहार था – यह तथ्य भी यह वीडियो स्पष्ट रूप से सामने रखता है!
जो लोग पूछते हैं कि एक शताब्दी पहले हुई उस त्रासदी को फिर क्यों याद किया जा रहा है, उनसे कहना है – सब कुछ सहकर और क्षमा करके जीने वाली जनता की सहनशीलता पर पैर रखकर जब कोई उपहास करता है, तब कुछ बातें याद दिलाना आवश्यक हो जाता है!
- इतिहास की इन घटनाओं को याद करना किसी द्वेष, प्रतिशोध या मतपरक घृणा के लिए नहीं है!
- हमारे पूर्वजों द्वारा किए गए वीरतापूर्ण और गौरवपूर्ण बलिदानों के बारे में आने वाली पीढ़ियाँ सच्चाई के साथ अध्ययन कर सकें, इसके लिए!
- इतिहास को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत करने का प्रयास करने वालों के दावों का खंडन करने और वास्तविक इतिहास को दुनिया के सामने रखने के लिए!
- भविष्य में किसी भी समाज के साथ ऐसी त्रासदियों की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए जागरूकता और विवेक पैदा करने हेतु!
इस ऐतिहासिक विषय पर जनता को जागरूक करने के लिए आर्ष विद्या समाज क्या कार्य कर रहा है, यह भी वीडियो में बताया गया है!!
जिस जनता ने इतिहास को भुला दिया, उसका भविष्य भी नहीं होता! इतिहास में हुई गलतियों से सीख लेकर हमें आगे बढ़ना चाहिए।
सनातन धर्म के लिए कष्ट और मृत्यु सहने वाले हमारे पूर्वजों की उज्ज्वल स्मृति को कोटि-कोटि प्रणाम।