‘द केरल स्टोरी 2: गोज़ बियॉन्ड’ (एक समीक्षा)
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‘द केरल स्टोरी 2: गोज़ बियॉन्ड’ (एक समीक्षा)
फिल्म में एक लड़की अपने माता-पिता से-जो उसे समझाने की कोशिश करते हैं-कहती है कि उन्हें “इस्लामोफोबिया” है। जो लड़की अपने प्रेमी को एक सेक्युलर जेंटलमैन बताकर गर्व करती थी, वही अंत में कड़वी सच्चाइयों को पहचानती है। इस फिल्म में एक घटना यह भी दिखाई गई है कि कोई व्यक्ति हिंदू आस्तिक बनकर प्रेम-जाल में फँसाता है। ऐसे कई अल-तक़िया (कथित “पवित्र झूठ” या छल) भी दिखाए गए हैं। एक जगह परिवार द्वारा रोके गए नृत्य को प्रोत्साहित करके एक व्यक्ति लड़की को फँसाता है, फिर उसे मुस्लिम बना देता है और बाद में कहता है कि डांस हराम है। पत्नी के गर्भवती होने के दौरान वह दूसरी महिला को नई दुल्हन बनाकर घर लाता है। ये सब भारत के विभिन्न हिस्सों में घटित और घटित हो रही घटनाओं के केवल कुछ अंश के रूप में प्रस्तुत किए गए हैं।
फिल्म की मुख्य पात्र एक लड़की वास्तविक जीवन में अनुजा है, जो Maharaja’s College, Ernakulam में एसएफआई नेता थी (यही वह कॉलेज है जहाँ जिहादियों द्वारा मारे गए अभिमन्यु पढ़ते थे)। दो बच्चों के पिता और विवाहित खलीम नामक भेड़ की खाल में छिपे भेड़िये के लव-ट्रैप जिहाद के जाल में फँसी अनुजा अंततः क्रूर यातना झेलने के बाद कमरे में सिर पूरा मुँडाया हुआ, फाँसी पर लटकी हुई पाई गई। यह कुछ वर्ष पहले कोच्चि में हुई वास्तविक घटना है। क्या इसे छिपाने के लिए Social Democratic Party of India के अधीन कार्यकर्ताओं की ये अलोकतांत्रिक हरकतें हैं? क्या थिएटरों में दिखाया जाने वाला उनका गुंडागर्दी भरा व्यवहार इसी का संकेत नहीं है? क्या हाल ही में Democratic Youth Federation of India के तथाकथित “प्रगतिशील” कार्यकर्ताओं ने Anashwara Theatre, Kottayam में जो धमकी भरा नाटक किया, वह बीफ मुद्दे की आड़ में हिंदू-ईसाई युवाओं का जीवन नरक बनाने वाले जिहादी चरमपंथियों की रक्षा के लिए नहीं था?
सज्जनों से निवेदन..!
माननीय Kerala High Court की डिवीजन बेंच द्वारा अनुमति प्राप्त फिल्म देखने आए लोगों को धमकाकर भगाने और हिंसा करने वालों के विरुद्ध थिएटर मालिकों, फिल्म से जुड़े लोगों (निर्माता, निर्देशक आदि) या आम जनता को कम से कम एक मामला दायर करने के लिए तैयार होना चाहिए-ऐसा विनम्र निवेदन है।
माननीय हाई कोर्ट से प्रार्थना…!
माननीय हाई कोर्ट के आदेश को कोई महत्व न देने वाले उपद्रवियों की गिरफ्तारी हेतु ‘स्वतः संज्ञान’ लेकर निर्देश देने का अधिकार माननीय हाई कोर्ट को है—इस आशा के साथ विनम्र प्रार्थना है कि आवश्यक कार्रवाई की जाए।
माननीय राज्य पुलिस प्रमुख से निवेदन…!
माननीय हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच द्वारा अनुमति प्राप्त फिल्म देखने आए लोगों को धमकाने और हिंसा करने वालों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए तथा इच्छुक दर्शकों को निर्भय होकर फिल्म देखने हेतु आवश्यक पुलिस सुरक्षा प्रदान की जाए – ऐसी सविनय प्रार्थना है।
यह फिल्म दिखाती है कि कड़े कदमों के माध्यम से कानून-व्यवस्था की समस्याएँ, घरेलू हिंसा और तथाकथित रेप जिहाद समाप्त किए जा सकते हैं। किंतु यदि इसमें शांत तरीके से चल रही जिहादी स्लीपर-सेल गतिविधियों, भ्रामक मतांतरण कार्यक्रमों तथा उग्रवादी-आतंकवादी विचारों और भर्ती प्रक्रियाओं को जड़ से समाप्त करने योग्य वास्तविक वैचारिक संघर्ष भी प्रस्तुत किया गया होता, तो प्रेम-जाल में फँसने वालों के लिए और अधिक प्रभावी जागरूकता और प्रतिरोध तैयार होता।
हिंदू नेतृत्व से निवेदन…!
उपद्रवियों से अनुमति मांगने के बजाय सभी हिंदू संगठन नेताओं और सामुदायिक नेताओं से विनम्र अनुरोध है कि वे प्रेस कॉन्फ्रेंस करके यह घोषणा करें—“फिल्म देखने निर्भय होकर आइए, हम सुरक्षा देंगे” – और इस आश्वासन को निभाते हुए जनता को संरक्षण दें। क्या लोग कुछ लोगों के डर से ही थिएटर नहीं आ रहे हैं? वास्तव में क्या जनता के लिए आत्मविश्वास और साहस के साथ फिल्म देखने का वातावरण तैयार नहीं किया जाना चाहिए? यदि स्वाभिमानी हिंदू नेता संगठनात्मक आह्वान करें, तो सभी को यह फिल्म देखने का अवसर मिलेगा। हमें यह तथ्य नहीं भूलना चाहिए कि कम्युनिस्ट आंदोलन ने सड़क नाटकों, कविताओं, लोकगीतों और KPAC जैसे समूहों के नाटकों के माध्यम से ही अपनी जड़ें मजबूत की थीं। सैकड़ों भाषणों से अधिक एक कलाकृति जनमानस पर गहरा प्रभाव डाल सकती है। आध्यात्मिक नेता, संत-महात्मा और हिंदू नेतृत्व से विनम्र निवेदन है कि वे इस विषय में सक्रिय रुख अपनाएँ।
श्री विपुल अमृतलाल शाह जी और श्री अमरनाथ झा जी द्वारा लिखित इस फिल्म में सुरेखा के रूप में उल्का गुप्ता, दिव्या के रूप में अदिति भाटिया, नेहा के रूप में ऐश्वर्या ओझा, सलीम के रूप में सुमित गहलावत, फैज़ान के रूप में अर्जन सिंह औजला, राशिद के रूप में युक्तम खोसला और हफ्सा बेगम के रूप में अल्का अमीन ने प्रभावशाली अभिनय किया है। अभिनय, प्रस्तुति, पृष्ठभूमि संगीत, गीत, भावनाएँ, कहानी, पटकथा और संवाद अत्यंत उत्कृष्ट हैं। क्लाइमेक्स और क्लाइमेक्स गीत आशा के साथ धर्म विजय के पंचजन्य-नाद के समान प्रतीत होते हैं। हर दृष्टि से द केरल स्टोरी 2: गोज़ बियॉन्ड का दूसरा भाग पहले भाग से अधिक हृदयस्पर्शी है।
जो लोग व्यंग्य से पूछते हैं कि द केरल स्टोरी 2: गोज़ बियॉन्ड में केरल कहाँ है, उन्हें उत्तर है-“दोनों में केरल है।” जो पूछते हैं कि क्या यह केरल की कहानी है- हाँ, यह केरल की भी कहानी है। यह केवल हमारी बहनों की नहीं, बल्कि हमारे परिवारों की भी कहानी है। फिल्म यह संदेश देती है कि गलत निर्णयों के कारण होने वाली दुखद घटनाएँ किस प्रकार लड़कियों के जीवन को बदल देती हैं और ऐसे जालों से बचने के लिए सजग रहने की आवश्यकता है।
उत्तिष्ठत! जाग्रत!!