आर्ष विद्या समाजम स्थापना दिवस – 8 जुलाई 2026
आज (8 जुलाई 2026):
आर्ष विद्या समाजम के स्थापना के 27 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं…!
आधुनिक युग की चुनौतियों और संभावनाओं को पहचानकर, पंचमहा कर्तव्यों को वैज्ञानिक और व्यवस्थित तरीके से निभाते हुए, श्री परमेश्वर और आर्ष गुरु परंपराओं द्वारा दिए गए “कृण्वंतो विश्वमार्यम” (मानव और जगत को श्रेष्ठ बनाना) के महान मिशन को पूरा करने के लिए 1999 जुलाई 8 को सद्गुरुदेव आचार्यश्री मनोज जी महाराज द्वारा स्थापित आध्यात्मिक-दार्शनिक-शैक्षणिक-सांस्कृतिक-पुनर्जागरण संस्था ही आर्ष विद्या समाजम (AVS) है।
AVS इस लक्ष्य को दो तरह से पूरा करने का उद्देश्य रखता है: भावात्मक और संरक्षणात्मक।
भावात्मक:- वास्तविक सनातन धर्म और उस दिव्य विज्ञान के लाभों को – (अर्थात पूर्ण स्वास्थ्य, समग्र व्यक्तित्व विकास, मानव विकास, संपूर्ण जीवन विजय, श्रेष्ठ समाज निर्माण, सर्वदुखों का समूल निवारण आदि) दुनिया भर में पहुँचाना।
संरक्षणात्मक:- आज समाज जिन छह प्रकार की आसुरी शक्तियों का सामना कर रहा है, उनसे लोगों को मुक्त कराना।
इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए उन्होंने ‘दशतल प्रवर्त्तन पद्धति’ (दस चरणों की कार्ययोजना) नामक एक अनूठी संगठनात्मक योजना तैयार की है।

सरल शब्दों में कहें तो आर्ष विद्या समाज की गतिविधियाँ तीन स्तरों पर हैं:
1)Intervention, Recovery & Rehabilitation (आपातकालीन रक्षा योजना / Rescue Operation)
समाज में हर किसी को बचपन से ही कई तरह से प्रभावित करने वाले छह प्रकार के ब्रेन वॉशिंग के शिकार होकर अपने, अपने परिवार, समाज, राष्ट्र और दुनिया के खिलाफ जाने वालों को वापस लाने का यह एक आपातकालीन चिकित्सा उपाय (रेस्क्यू ऑपरेशन) है। ‘सुदर्शनम डी-रेडिकलाइजेशन’ मार्गदर्शन के माध्यम से आर्ष विद्या समाज इस कार्य को करता है।
सामान्य ज्ञान, चर्चा के लिए तत्परता और सत्य को जानने पर उसे स्वीकार करने की बौद्धिक प्रतिबद्धता – इन तीन शर्तों को मानने वाले किसी भी व्यक्ति को सही रास्ते पर लाने की वैचारिक शक्ति से युक्त डी-रेडिकलाइजेशन काउंसलिंग कार्यक्रम!!! न केवल रेडिकलाइजेशन के शिकार हुए लोगों को, बल्कि इन आसुरी शक्तियों के मिशनरी प्रवक्ता बने लोगों को भी वापस लाकर सनातन धर्म का प्रचारक बनाने का गौरवशाली इतिहास आर्ष विद्या समाज के पास है।
राष्ट्रविरोधी मतांतरण सहित गलत विचारधाराओं से रास्ता भटक रहे हजारों लोगों को सन्मार्ग पर लाने वाले महात्मा सद्गुरुदेव आचार्यश्री मनोज जी महाराज हैं। अज्ञानता, गलतफहमी और ब्रेन वॉशिंग के कारण राष्ट्रविरोधी विचारों से प्रभावित हुए 8,500 से अधिक युवक-युवतियों को आचार्य जी पहले ही वापस ला चुके हैं!! इसमें से करीब एक हजार लोगों को रेडिकलाइजेशन का सामना करने की क्षमता मिली है। वापस आए सौ से अधिक लोग अपने अनुभवों को सार्वजनिक रूप से साझा करने के लिए तैयार हैं। बीस से अधिक लोग सनातन धर्म के प्रचारक और प्रचारिकाओं के रूप में सेवा कर रहे हैं। 4 लोगों ने अपने अनुभवों का वर्णन करते हुए पुस्तकें लिखी हैं।
2) जागरूकता या प्रतिरोध (PREVENTION):
गलत विचारों की ओर बढ़ने से रोकना इस क्षेत्र का कार्य है। दर्शन, इतिहास और वर्तमान समय को रेखांकित करते हुए समाज को प्रभावित करने वाले भ्रम को दूर करने का यह कार्यक्रम है। सटीक जागरूकता के माध्यम से लाखों लोगों को सही मार्गदर्शन देकर रेडिकलाइजेशन को रोकना संभव हुआ है। विभिन्न संस्थाओं को डी-रेडिकलाइजेशन काउंसलिंग में प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।
3) मूलभूत समस्या समाधान (स्थायी योजना):
समस्याओं का स्थायी समाधान खोजने (कारण का पता लगाकर मूल सहित समस्या का समाधान करने) के साथ-साथ ‘लोकाः समस्ताः सुखिनो भवन्तु’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए AVS ने चार प्रकार की अनूठी गतिविधियाँ तैयार की हैं!
(a) समग्र और वैज्ञानिक अनुष्ठान – अनुसंधान – प्रशिक्षण योजना: पाठ्यक्रम (शिवशक्ति योगविद्या, आध्यात्मिक शास्त्रम, भारतीय संस्कृति, विद्यार्थी निपुणता वर्ग (SEP: स्टूडेंट्स एक्सीलेंस प्रोग्राम), सुदर्शनम, मृत्युंजयम, संगठनात्मक शास्त्र, व्यायामकी विज्ञान) कक्षाएं, शिविर आदि।
(b) धर्म प्रचारक पद्धति (संगठनात्मक योजना): सनातन धर्म प्रचारकों की पहचान कर, उन्हें प्रशिक्षित कर विभिन्न स्थानों और विभिन्न क्षेत्रों में तैनात करना।
(c) संस्थाओं की योजना: साधना शक्ति केंद्र, विज्ञानभारती अंतर्राष्ट्रीय अध्ययन अनुसंधान प्रतिष्ठान, विज्ञानभारती विद्या केंद्र, विज्ञानभारती लर्निंग सेंटर्स।
(d) व्यापक और समग्र वास्तविक सेवा-सशक्तिकरण-संरक्षण गतिविधियाँ।
सनातन धर्म को दुनिया भर में पहुँचाने के महान लक्ष्य के हिस्से के रूप में, आर्ष विद्या समाज ने केरल के तिरुवनंतपुरम, एर्नाकुलम, त्रिशूर जिलों के साथ-साथ चेन्नई, बैंगलोर, महाराष्ट्र और दिल्ली में केंद्र शुरू किए हैं।
2026 में भारत के अन्य राज्यों और विदेशों में भी अपनी गतिविधियों का विस्तार करना इसका लक्ष्य है।
किन्तु, बीते हुए पथ पर यदि एक दृष्टि डालें, तो यह स्पष्ट होता है कि आर्ष विद्या समाजम की यात्रा सुगम और सुंदर नहीं थी!
एक ओर, विकास में भी बाधा उत्पन्न करने वाली आर्थिक विवशताएँ…! दूसरी ओर, मतांतरण माफियाओं तथा वोट बैंक की राजनीति से उत्पन्न होने वाली धमकियाँ और चुनौतियाँ…!!
अनेक झूठे मुकदमे…! दुष्प्रचार…!! निरंतर चलते रहे…!!!
किन्तु, इन सबका सामना कर पाना केवल सर्वेश्वर की करुणा, आर्ष गुरु-परम्परा के आशीर्वाद, सनातन धर्मशास्त्र की कृपा तथा आर्षविद्यासमाज के गुरुनाथ आचार्यश्री की सशक्त उपस्थिति एवं मार्गदर्शन के कारण ही संभव हो सका…!
निन्दा-स्तुति में हो, मान-अपमान में हो, सुख-दुःख में हो, जय-पराजय में हो अथवा लाभ-हानि में – बिना विचलित हुए, स्थितप्रज्ञ बने रहने वाले सद्गुरु ही हमारे आदर्श हैं…!
जीवन की अंतिम श्वास तक, इस सत्कर्म-पथ पर दृढ़ साहस के साथ आगे बढ़ते रहने के अटल संकल्प के साथ, राष्ट्रीय जनसमुदाय के लिए स्वास्थ्य-शिक्षा सेवाओं, समग्र सशक्तिकरण तथा संरक्षण के प्रयासों में Team AVS बिना थके, बिना डगमगाए, एकजुट होकर आगे बढ़ती रहेगी..!!
आर्ष विद्या समाजम (AVS) की अब तक की विकास-यात्रा में सहयोग प्रदान करने वाले तथा कठिन परिस्थितियों में हमारे साथ खड़े होकर सहायता करने वाले सभी शुभचिंतकों के प्रति हम अपनी निष्कपट श्रद्धा, प्रेम एवं कृतज्ञता व्यक्त करते हैं…! आगे भी आप सभी का हर प्रकार का सहयोग प्राप्त होता रहे, ऐसी प्रार्थना हम जगदीश्वर के श्रीचरणों में करते हैं..!
स्नेह एवं आदर सहित,
आर्ष विद्या समाजम