मार्च 17 : श्री गौतम महर्षि अनुस्मरण दिवस
AVS
March 17, 2026
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सप्तऋषियों में प्रमुख स्थान रखने वाले गौतम महर्षि वैदिक काल के महानतम ऋषियों में से एक माने जाते हैं। वे अंगिरस वंश की गौरवशाली परंपरा में एक श्रेष्ठ योगी के रूप में विख्यात हैं। उन्होंने धर्मशास्त्र, वेदाध्ययन और तर्कशास्त्र के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिए।
षड्दर्शनों में से न्यायसूत्र के उपजाता, प्रवर्तक और प्रयोक्ता के रूप में भी श्री गौतम महर्षि प्रसिद्ध हैं। आर्ष भारत की गैर-नास्तिक तर्कपरंपरा का स्वरूप इस दर्शन में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। सही ज्ञान कैसे प्राप्त किया जाए, यह सिखाने वाला भारतीय तर्कशास्त्र (Indian Logic) ही न्याय दर्शन है। सत्य ज्ञान कैसे प्राप्त हो, सही और गलत में कैसे भेद किया जाए—इन विषयों पर विचार करने वाला ज्ञानशास्त्र (Epistemology) तथा प्रमाण दर्शन भी महर्षि गौतम द्वारा रचित न्यायसूत्र है।
न्यायसूत्र में प्रत्यक्ष, अनुमान, उपमान और शब्द—इन चार प्रमाणों का प्रतिपादन किया गया है।
ज्ञानचक्षु खोलने हेतु शास्त्र का प्रकाश देने वाले श्री गौतम महर्षि के पादपद्मों में कोटि-कोटि प्रणाम।